Tuesday, October 6, 2009

आधा सच आधा गप
चांउर वाले से गांधी बाबा तक

छत्तीसगढ़ में 'राम-राजÓ का सपना दिखाकर दूसरी बार सत्ता हथियाने वाली भारतीय जनता पार्टी भले ही इस सपना को साकार नहीं कर पा रही हो लेकिन इसकी जगह पर विराजमान 'रमन-राजÓ जरूर आम जनता के सपने को साकार करने में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाह रहा है। यही वजह है कि हर-एक खास मौके पर कुछ न कुछ फुलझड़ी छोड़कर आम जनता को खुश करने की कोशिश में लगा रहता है। पहले से ही 'चांऊर वाले बाबाÓ के रूप में ख्याति अर्जित कर चुके मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अब किसानों के उद्धार का बीड़ा उठाया है। गरीबों की गरीबी भले ही दूर न हो सकी हो लेकिन इसी बहाने अमीरों की अमीरी में अच्छी खासी वृद्धि जरूर हो गई है। पूरे प्रदेश में गरीबों की संख्या में इस कदर वृद्धि हुई है कि कार, मोटर सायकल और यहां तक कि हवाई जहाज में सफर करने वाले 'गरीबोंÓ की पौ-बारह है। और यह तो होना ही है। आखिर दुनिया में उसी की पूछ-परख होती है, जिनके पास 'मनी रामÓ होता है। फिर गरीब उससे अछूता कैसे रह सकता है? लिहाजा उन गरीबों की पूछ-परख बढ़ी है जिनके पास 'मनी रामÓ है यानी सर्वगुण संपन्न 'गरीबोंÓ को ही गरीबी रेखा से नीचे वाले 'लाल-पीले-नीलेÓ राशन कार्ड जारी हुए हैं और वे उनका भरपूर दोहन भी किए हैं। स्थिति यह है कि एक रुपया व दो रुपया किलो में चावल केवल 35 किलो ही नहीं बल्कि ये 'गरीबÓ तो बोरी भर-भर कर ट्रकों से ले जाते देखे गए हैं। इसे ही तो कहते हैं 'रमन-राजÓ और ऐसे में सब कुछ संभव है। गरीबों के बाद अब किसानों की बारी है। उनके उद्धार के लिए सरकार ने क्या-क्या जतन नहीं किए। उनके लिए हर तरह की सहायता देने का ऐलान किया है। तीन फीसदी ब्याज दर पर ऋण देने की घोषणा कर पूरे प्रदेश की पहली सरकार तो पहले ही बन गई थी जो ऐसा कर रही है। इतने से ही किसानों के दिन नहीं फिरने वाले, लिहाजा सरकार ने सरप्लस बिजली को मुफ्त में बांटने का समझदारी पूर्ण कार्य किया है। उसने पांच हार्स पावर के सिंचाई पंपों के लिए मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी 'गांधी जयंतीÓ पर इसे लागू कर सरकार ने बता दिया कि वे न केवल किसानो की हितैषी है बल्कि गांधी जी के 'ग्राम स्वराजÓ की कल्पना को भी साकार करना चाहते हैं। तभी तो गांधी जयंती पर मुख्यमंत्री ने किसानों को ब्याज मुफ्त ऋण देने की मंशा जाहिर करने के अलावा पंचवर्षीय योजनाओं की राशि का अधिक से अधिक बहाव देश के गांवों की ओर करने की बात कहकर आम जनता का दिल जीतने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि देश और प्रदेश के अंतिम गांव तक सड़क, सिंचाई, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हो, स्थानीय संसाधनों पर आधारित कुटीर उद्योगों का विकास हो, तभी हम राष्टï्रपिता के 'स्वावलंबी गांवÓ और 'ग्राम स्वराजÓ के सपने को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री की यह सोच तो काबिल-ए-तारीफ है। लेकिन अचानक मुख्यमंत्री का 'गांधी प्रेमÓ समझ से परे है। अब तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के पद चिन्हों पर चलने का दावा करने वाले डॉ. रमन सिंह का 'गांधी-प्रेमÓ देख प्रदेश की जनता न केवल अचंभित है बल्कि गदगद भी है। भले ही इससे संघी व कट्टर भाजपाई नाक-भौ सिकुड़े लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पडऩे वाला क्योंकि समय बड़ा बलवान होता है। आज जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत हर जगह चरितार्थ हो रही है ऐसे में मुख्यमंत्री से पंगा भला कौन लेना चाहेगा। फिर मुख्यमंत्री जी इतने बुद्धू भी नहीं हैं जो ऐसी बात यूं ही करेंगे। इसमें भी कई राज छिपे हुए हैं। समय-समय की बात है। नगरीय निकाय के चुनाव समीप है। ऐसे में गांव-गरीब व किसान की बात नहीं होगी तो फिर किसकी होगी? खैर। हमें क्या हम तो महज देखने-सुनने वाले हैं यदि भाजपा के राज में 'गांधी-बाबाÓ के दिन लौटेंगे तो बुराई ही क्या है?

1 comment:

  1. रमण जी अच्छा काम कर रहे है तो बुराई क्या है?हाँ गरीबों की योजनाओं के कुछ पैसे वाले अपना उल्लू सीधा करते ही है!ये तो राजीव गांधी ने भी माना था की केवल १५% ही जनता तक पहुँचता है..

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