
राखी का स्वयंवर और राजनीति
देश में इन दिनों प्यार, तकरार, संवाद, एक्शन, रोमांच सभी कुछ देखने-सुनने को मिल रहा है। यानी कि जनता के मनोरंजक के लिए भरपूर मसाला है। एक ओर राखी का स्वयंवर है तो दूसरी ओर समलैंगिकता का सवाल। वहीं राजनीतिज्ञों का राजनीतिक बवाल भी कम मनोरंजन नहीं है। मतलब सब कुछ यहीं है। राखी के स्वयंवर के बहाने जो शो दिखाया जा रहा है वह बेहद लोकप्रिय हो गया है। इस शो में न केवल राखी से ब्याह रचाने वाले युवक हैं बल्कि उनकी मां भी पूरे चमक-दमक से राखी सॉरी अपनी बहू से बतियाते नजर आती है। अब यह देखना दिलचस्प है कि राखी किनकी बहू बनेगी। अब तक तो 16 कुंवारे में से सिर्फ 5 ही बचे हैं। यानी फिलहाल इन पांच पांडव में राखी द्रौपदी की भूमिका में है। राखी ने बकायदा इन पांचों के लिए करवाचौथ का व्रत भी रखा। पांचों युवकों ने भी अपनी पतिव्रता पत्नी के सामने पत्नीव्रता होने का सबूत देने के लिए व्रत रखा। लेकिन इसमें इन युवकों की माताओं का शामिल होना इसे और रोचक बना गया। पांच में से 4 की माताओं ने अपनी भावी बहू और बेटों का व्रत खुलवाया। यह सब देखने-सुनने में अटपटा जरूर लगता है पर है सौ फीसदी सच। फिलहाल राखी पांच पांडव रूपी कुवारों की पत्नी द्रौपदी के रूप में जिस तरह बुद्धूबक्सा पर अवतरित होती है वह किसी परी की कथा की तरह रोमांचकारी से कम नहीं है। लोग चटखारे ले लेकर इसे देखते ही नहीं बल्कि मजा भी लेेते हैं और लेेंगे भी क्यों नहीं आखिर राखी है ही कमाल की। अपने पुराने दोस्त अभिषेक को थप्पड़ जडऩे के बाद सुर्खियां बटोरने वाली राखी हमेशा मीडिया की चहेती रही है और आज भी वह मीडिया में छायी हुई है। यह नुस्खा राखी के अलावा और किसी को आता तो वह राजनेताओं के अलावा दूसरा कोई हो नहीं सकता। आजकल राजनेताओं को भी मीडिया में छाने का चस्का लगा हुआ है। फिर चाहे वह तरीका गलत ही क्यों न हो। उत्तरप्रदेश में रीता बहुगुणा जोशी ने मायावती को ऐसा क्या कह डाला कि रातों-रात वह स्टार से सुपरस्टार हो गई। राष्टï्रीय क्या अंतर्राष्टï्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई। जो बात रीता ने अभी कही है। कमोबेश कुछ इसी अंदाज में पूर्व में मायावती ने मुलायम सिंह के राज में कही थी तब इतना बखेड़ा खड़ा नहीं हुआ था। अभी तो सोनिया जी तक को सामने आना पड़ा। उन्हें खेद जतानी पड़ी। बावजूद बसपाइयों ने बहनजी के इशारों पर वह सब कुछ कर डाला जो नहीं करना चाहिए। रीता बहुगुणा के घर तक को जला डाला। राजनीति में शुचिता का राग अलापने वालों के राज में बहनजी के भाइयों ने जो कहर बरपाया है वह कदापि उचित नहीं है लेकिन कहते हैं राजनीति में सब जायज है। कभी बहनजी ने भी यह सब भोगा है तो उसका बदला तो लेना ही था। और जब सत्ता हाथ में हो तो बदला लेने का इससे अच्छा अवसर और कब मिलेगा? सो वे चुन-चुनकर बदला ले रही हंै। वैसे यह तो होना ही था। जैसे को तैसा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। मुलायम राज की सतायी बहनजी अपने राज में पूरा सूद सहित वसूल रही हंै लेकिन उनको धैर्य भी रखना चाहिए आखिर ऊपर वाला सब कुछ देख-समझ रहा है। यदि उसका ब्रम्हास्त्र चल गया तो न तो बहन जी रहेंगी और न ही उनकी सत्ता। फिर हमें क्या हम तो सिर्फ बोल सकते हैं। खैर बात यही खत्म करें लेकिन क्यों? राजनीति के धुरंधर हर चीज में राजनीति ढूंढते हैं। अब देख लें हाईकोर्ट ने समलैंगिकता को कानूनी मान्यता क्या दी बवाल खड़ा हो गया। नेता-अभिनेता को तो छोड़ दें मुल्ला-मौलवी से लेकर बाबाओं तक की भुजाएं फड़कने लगी है लेकिन मामला कोर्ट में है, लिहाजा न तो बाबाओं की चलेगी और न ही नेताओं की। सब कुछ अब उन पर निर्भर है यानी कोर्ट पर। फिर भी इनकी चिल्लपों थम नहीं रही है। अच्छा भी है इसी बहाने चर्चा में जो हैं और राजनीति के लिए यह जरूरी भी है।

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