Monday, July 27, 2009

नौसेना एटमी ताकत से लैस

नौसेना एटमी ताकत से लैस
भारत पहली स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलित पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत (दुश्मन का नाश) के जलावतरण के साथ रूस, चीन, फ्रांस व ब्रिटेन के बाद यह क्षमता हासिल करने वाला छठा देश बन गया है। अब यह थल और आकाश के बाद गहरे समुद्र के भीतर से परमाणु हमले का करारा जवाब दे सकता है। नि:संदेह भारत के लिए यह बेहद अहम उपलब्धि है तथा नौ सेना के क्षेत्र में उसने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। इस परमाणु पनडुब्बी का परीक्षण अभी डेढ़ साल तक चलेगा और उम्मीद है कि यह 2011 तक पूरी तरह काम करने लायक हो पाएगी। भारत की सुरक्षा के लिहाज से समुद्री सीमाएँ बेहद अहम होती जा रही हैं और सैन्य तैयारी को बदलते परिवेश में ढालना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी कहा है कि सरकार राष्ट्रीय हितों और भौगोलिक अखंडता की रक्षा के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा तेवर आक्रामक नहीं है और न हम किसी को डराना चाहते हैं। हम अपनी सेेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए लगातार काम करते रहेंगे, जिससे वे नवीनतम प्रौद्योगिकी से लैस रहें। उल्लेखनीय है कि पूर्णत: स्वदेश में निर्मित पनडुब्बी अरिहंत को परमाणु ईंधन से चलने के कारण बार-बार ईंधन व आक्सीजन लेने के लिए समुद्र के भीतर से बाहर आने की जरूरत नहीं है। समुद्र के भीतर 500 मीटर नीचे तक लंबे समय तक रहने में वह सक्षम है। साथ ही समुद्र में सतह के नीचे प्रति घंटा 22 से 28 समुद्री मील तक दौडऩे में सक्षम है। फिलहाल इसमें 700 कि.मी. तक मार करने वाली एक दर्जन के -15 मिसाइलें होंगी। आने वाले समय में 3500 कि.मी. तक मार करने में सक्षम के-एक्स मिसाइल तैनाती की योजना है। इसमें क्रूज मिसाइल भी तैनात की जा सकेंगी। पनडुब्बी में परमाणु ईंधन के जरिए 85 मेगावाट बिजली उत्पादन के संयंत्र भी मौजूद हैं। नौसेना की योजना अगले 20 सालों में ऐसी 10 पनडुब्बियों के निर्माण की है। यहां यह बताना लाजिमी है कि अरिहंत का स्वप्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 39 साल पहले देखा था। उन्होंने 1970 में नौ सेना व भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र को इस पर काम करने कहा था। तकनीकी रूप से परमाणु ईंधन चलित प्रणालियाँ तैयार करने की योजना 60 के दशक में बन गई थी। हालांकि इंदिरा गांधी के सपने को साकार करने का काम 1984 में एडवांस वैसल कार्यक्रम के तहत शुरू हो पाया। बहरहाल हमारे वैज्ञानिकों की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर पूरे देशवासियों को गर्व है। उन्हें इस नई एटमी ताकत पर ढेरों बधाइयां व शुभकामनाएं।

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